वर्तमान समय में शासन उच्च शिक्षा मे गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए शोधार्थियों को प्रोत्साहित कर रही है, किसी भी देश का समग्र विकास उस देश की शिक्षा पर निर्भर करता है, नए – नए विचार, रचनात्मक सोच, समाज को सदैव नई ऊँचाइयों पर पहुंचाती हैं, हमारा ‘शोध उत्कर्ष’ भी इसी महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण कार्य को मूर्तरूप देने के लिए कृत संकल्पित है।
सामान्य तौर पर विविध विषयों के बहुत सारे युवा लेखक,लेखिका, शोध छात्र, छात्रा, शिक्षक हैं, जिनको एक मंच प्रदान करना है, जिससे वो अपनी रचना धर्मिता को दुनियां के सामने प्रस्तुत कर सकें.युवाओं में शोध करने, कुछ नया करने की असीम क्षमता होती है लेकिन उस क्षमता को अभिव्यक्ति प्रदान करने का मंच नहीं मिलता, जिसके अभाव में प्रतिभा दब कर दम तोड़ देती है, युवा वर्ग सामाजिक परिवर्तन करने एवं राष्ट्र – निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सकते है|
भारतीय पारम्परिक खोई हुई मूल्यों, आदर्श, सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को बचाने का प्रयास करते हुए एक नया समता, स्वतंत्रता, न्याय पूर्ण, मानवतावादी समाज बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं, नये – नये वैज्ञानिक शोध के साथ तमाम विषयों में नए आयाम प्रदान कर सकते हैं, ऐसे परिवर्तन व तर्क पूर्ण नवीन वैज्ञानिक सोच, समाज के कल्याण के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
देश की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक उन्नति के साथ चिंतन परम्परा को बेहतर बनाने, वैश्विक सोच विकसित करने, वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा को चरितार्थ करने, का एक मात्र रास्ता यही है कि हम नित नए अन्वेषी बनें और उसके लिए मार्ग प्रशस्त करें।
‘शोध उत्कर्ष’ यही कार्य कर रहा है, इस वैज्ञानिक युग में वैज्ञानिक नियमों का पालन करते हुए देश व विश्व को आज का युवा वर्ग एक नई दिशा दे सकता हैं, जरूरत है कि ऐसे मेधावी लोगों को विख्यात एवं चर्चित पत्र – पत्रिकाओं में स्थान मिले, इस कमी को दूर करने के लिए ‘शोध उत्कर्ष’ पत्रिका जो कि विविध विषयों को त्रैमासिक तौर पर ई – जर्नल के रूप में प्रकाशित करता है, प्रेम, भाईचारा, साम्प्रदायिक सद्भावना, देशप्रेम, समानता स्थापित करना इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य है।
~ डॉ. एन.पी. प्रजापति
(प्रधान संपादक)