हरमहेन्द्र सिंह बेदी जी के काव्य में समाज और मनोजगत

लेखक

  • शिल्पा भाटिया ##default.groups.name.author##

सार

साहित्य को समाज का आईना माना जाता है। जब भी इंसानी भावनाओं का ज्वार उठा है, लोगों को कविता में सुकून मिला है। कविताएँ न केवल हाल के समय में, बल्कि अनादि काल से लिखी और पढ़ी जाती रही हैं; समाज में बदलाव के बावजूद ये हर जगह और हर दौर में प्रासंगिक बनी हुई हैं।

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प्रकाशित

2024-12-31

अंक

खंड

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