हरमहेन्द्र सिंह बेदी जी के काव्य में समाज और मनोजगत
Abstract
साहित्य को समाज का आईना माना जाता है। जब भी इंसानी भावनाओं का ज्वार उठा है, लोगों को कविता में सुकून मिला है। कविताएँ न केवल हाल के समय में, बल्कि अनादि काल से लिखी और पढ़ी जाती रही हैं; समाज में बदलाव के बावजूद ये हर जगह और हर दौर में प्रासंगिक बनी हुई हैं।







