[1]
“कवि डॉ.बृजेश सिंह की ग़ज़लों में अस्मितामूलक विमर्श ”, s, vol. 2, no. 5, पृ. 29–30, मार्च 2024, अंतिम उपयोग: 3 जून, 2026. [ऑनलाइन]. पर उपलब्ध: https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/117