कवि डॉ.बृजेश सिंह की ग़ज़लों में अस्मितामूलक विमर्श

Authors

  • प्रा.रविंद्र पुंजाराम ठाकरे & प्रो.डॉ.अनिता पोपटराव नेरे Author

Abstract

भारतीय सामाजिक व्यवस्था सदियों से जाति और वर्ग-विभाजन पर आधारित रही है। यहाँ, अमीर और गरीब के बीच की खाई अत्यंत गहरी है।
भारत अमीरों के लिए एक गरीब देश है, फिर भी गरीबों और वंचितों के लिए यह एक सुसंस्कृत भूमि है।
यहाँ सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक असमानताएँ अपने चरम पर हैं।

References

Downloads

Published

2024-03-31

How to Cite

कवि डॉ.बृजेश सिंह की ग़ज़लों में अस्मितामूलक विमर्श . (2024). Shodh Utkarsh, 2(5), 29-30. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/117