सीधी जिले में कोल जनजाति एवं महिलाओं की राजनीतिक सहभागिताः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
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https://doi.org/10.67275/rw82yf25##semicolon##
महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता##common.commaListSeparator## एक विश्लेषणात्मक अध्ययन##common.commaListSeparator## भारत में आजादी##common.commaListSeparator## राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्राप्तसार
भारत में आजादी के लगभग 45 वर्ष बाद 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत् पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ, जिसने स्थानीय स्वशासन को ग्रामीण भारत में सत्ता के विकेंद्रीकरण का सशक्त माध्यम बनाया। इस संशोधन के अंतर्गत कई उपबन्ध किए गए जिनके से महिलाओं तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था भी की गई थी, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों खासकर अनुसूचित जाति और जनजातियों को निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में सहभागी बनाना था। तथापि, आज आजादी के 80 वर्ष बाद भी संवैधानिक प्रावधान और व्यावहारिक सहभागिता के मध्य एक स्पष्ट अंतराल विद्यमान दिखता है, विशेष रूप से उन वनांचल क्षेत्रों में जहाँ जनजातीय एवं लैंगिक पहचान एक साथ दिखने लग जाती हैं।







