कृषि उपार्जन एवं नवाचारी जनसंचार साधनों का पिछड़ा वर्ग की महिलाओं में सशक्तीकरण (रीवा जिले के विशेष संदर्भ में)
सार
नए दौर की मांग है कि समाज और परिवार का सर्वांगीण और संतुलित विकास हो। ऐसा संतुलन तभी हासिल किया जा सकता है जब समाज और परिवार को बनाने वाली दो अहम मानवीय इकाइयों—यानी महिलाओं और पुरुषों—के विकास का रास्ता एक जैसा हो। अगर महिलाओं या पुरुषों में से किसी एक का विकास असंतुलित रहता है, तो विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।







