परसाई की पारसाईता
सार
जैसे ही हिंदी व्यंग्य विधा का ज़िक्र आता है, अगर कोई एक नाम सबसे पहले ज़हन में उभरता है, तो वह है ‘हरिशंकर परसाई’। हालाँकि हिंदी व्यंग्य के क्षेत्र में कई जाने-माने व्यंग्यकारों की एक लंबी और प्रतिष्ठित सूची मौजूद है, फिर भी परसाई का कोई सानी नहीं है। संदर्भ चाहे कोई भी हो—स्थान, काल या परिस्थिति—और बात चाहे अतीत की हो, वर्तमान की या भविष्य की; परसाई की व्यंग्य रचनाओं के मूल में एक अनोखी ताज़गी हमेशा महसूस की जा सकती है।







