पंत जी के काव्य में सामाजिक चेतना
सार
एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण केवल एक स्वस्थ समाज के माध्यम से ही संभव है।
हमारे देश में, सामाजिक चेतना जागृत करने के प्रयास प्राचीन काल से ही चले आ रहे हैं। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में, सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने का यह विशाल कार्य विशेष रूप से 'भक्ति काल' के साहित्य में परिलक्षित होता है।







