पंत जी के काव्य में सामाजिक चेतना

Authors

  • डॉ. कृष्ण बिहारी रॉय Author

Abstract

एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण केवल एक स्वस्थ समाज के माध्यम से ही संभव है।
हमारे देश में, सामाजिक चेतना जागृत करने के प्रयास प्राचीन काल से ही चले आ रहे हैं। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में, सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने का यह विशाल कार्य विशेष रूप से 'भक्ति काल' के साहित्य में परिलक्षित होता है।

References

Published

2024-03-31

How to Cite

पंत जी के काव्य में सामाजिक चेतना . (2024). Shodh Utkarsh, 2(5), 33-33. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/119