सिनेमा और कमलेश्वर: एक साहित्यिक यात्रा

लेखक

  • डॉ. गीतु दास असिस्टेंट प्रफेसर- हिन्दी विभाग Poovannanvilayil, Kannankuzhy Po Kannankuzhy Mavelikara, Alappuzha ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.67275/SU.2026.041402

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कमलेश्वर##common.commaListSeparator## फिल्म##common.commaListSeparator## इंडियन सिनेमा##common.commaListSeparator## दूरदर्शन##common.commaListSeparator## पटकथा##common.commaListSeparator## सामाजिक##common.commaListSeparator## राजनीतिक

सार

कमलेश्वर हिंदी कथा जगत में प्रमुख वक्ता के रूप में अवतीर्ण हुए । एक प्रगतिशील कथाकार होने के कारण उनमें जीवन की प्रतिबद्धता एवं शाश्वत मूल्यों के प्रति विद्रोह का आग्रह विद्यमान रहा है । हमारे समाज में ऐसी कई आदतें और परंपराएँ मौजूद हैं जो अज्ञानता पर आधारित हैं और हमारे समाज की प्रगति को अवरुद्ध कर दिया है । जाति व्यवस्था, छुआछूत, दहेज और पर्दा प्रथा की कठोरता से हमारे समाज को बहुत नुकसान हुआ है और यह फ़िल्में इन संकटों से लड़ने में बहुत मदद करती हैं । चूँकि उनका उपयोग अन्य बातों के अलावा, राष्ट्रीय एकता, निषेध, अंतरजातीय विवाह, परिवार नियोजन और निरक्षरता उन्मूलन को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है । इस प्रकार के विषय हमारे समाज के परिवर्तन में सहायता कर सकते हैं । कमलेश्वर ने फिल्मों के द्वारा कठोर सामाजिक यथार्थ को भी लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया । इस लेख में कमलेश्वर के उपन्यासों पर आधारित फिल्मों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है ।

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प्रकाशित

2026-06-30

अंक

खंड

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