वर्तमान समय में प्रासंगिक यथार्थवादी कथाकार : अमरकांत

लेखक

  • सय्यद मखसूद शोधार्थी हिन्दी विभाग हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविध्यालय ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.67275/SU.2026.041401

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अमरकांत##common.commaListSeparator## यथार्थवादी कथा साहित्य##common.commaListSeparator## नई कहानी आंदोलन##common.commaListSeparator## मध्यवर्गीय जीवन##common.commaListSeparator## बेरोजगारी और शोषण##common.commaListSeparator## सामाजिक यथार्थ##common.commaListSeparator## आर्थिक विपन्नता##common.commaListSeparator## मानवीय संबंधों का विघटन##common.commaListSeparator## कस्बाई परिवेश##common.commaListSeparator## समकालीन प्रासंगिकता##common.commaListSeparator## जिंदगी और जोंक##common.commaListSeparator## डेप्यूटी कलेक्टरी##common.commaListSeparator## हिंदी कहानीकार

सार

यह शोध-पत्र हिंदी साहित्य के प्रमुख यथार्थवादी कथाकार अमरकांत को वर्तमान समय की प्रासंगिकता के संदर्भ में विश्लेषित करता है। अमरकांत (1925-2014) का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के गाँव नगरा में हुआ। उनके जीवन की प्रारंभिक घटनाएँ, क्रांतिकारी विचारों से प्रभाव, गांधी-नेहरू-जयप्रकाश नारायण जैसे व्यक्तित्वों का असर और मध्यवर्गीय संघर्षों से भरा उनका अपना अनुभव उनके साहित्य की आधारशिला बने। अमरकांत नई कहानी आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने आधुनिकतावाद के आकर्षण से बचते हुए देशी परिवेश, मध्यवर्गीय जीवन, शोषण, बेरोजगारी, आर्थिक विपन्नता, मानवीय संबंधों के टूटने और पूँजीवादी व्यवस्था की विकृतियों को यथार्थवादी ढंग से चित्रित किया। उनकी प्रमुख कहानियों — ‘जिंदगी और जोंक’, ‘बहादुर’, ‘इंटरव्यू’, ‘डेप्यूटी कलेक्टरी’, ‘दोपहर का भोजन’, ‘हत्यारे’, ‘देश के लोग’, ‘कुहासा’, ‘निर्वासित’ आदि — के माध्यम से लेखक दिखाता है कि अमरकांत का साहित्य आज भी पूर्णतः प्रासंगिक है क्योंकि इनमें वर्णित बेरोजगारी, शोषण, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास, परिवारिक विघटन और निम्न-मध्यवर्ग की पीड़ा आज के भारत में भी जीवंत हैं।अमरकांत की विशेषता यह है कि वे केवल बौद्धिक सहानुभूति नहीं दिखाते, बल्कि स्वयं उस दयनीयता और असफलता का हिस्सा बनकर लिखते हैं। निष्कर्षतः शोध-पत्र अमरकांत को समकालीन यथार्थवादी कथाकार के रूप में प्रतिष्ठित करता है, जिनकी रचनाएँ आज भी समाज की विसंगतियों को उजागर करने और मानवीय संवेदना जगाने में सक्षम हैं।

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प्रकाशित

2026-06-30

अंक

खंड

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