भारतीय ज्ञान परम्परा में कबीर की भूमिका

Authors

  • डॉ. नमिता जैसल सहायक आचार्य(हिंदी विभाग) बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/31et3k80

Keywords:

ज्ञान परम्परा, वेद, उपनिषद, धार्मिक, दार्शनिक, औपचारिक, वाणी, वसुधैव, कुटुम्बकम्, रहस्यवाद, शास्त्रसम्मत

Abstract

भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्धशाली और विविधतापूर्ण रही है। यह परंपरा मात्र वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों तक सीमित नहीं थी, बल्कि भक्ति साहित्य संत वाणियों एवं जनप्रचलित लोक परंपराओं, के माध्यम से समाज के व्यापक वर्गों तक भी पहुँची। इस ज्ञान परंपरा को लोकजीवन से जोड़ने में जिन संतकवियों का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है उनमें संत कबीर का नाम सर्वोपरि हैं। वे संत कवि के साथ-साथ महान समाज सुधारक और उच्चकोटि के विद्वान भी थे । उन्होनें सामाजिक, धार्मिक, दार्शनिक विमर्श को अत्यंत ही सरल भाषा में प्रस्तुत कर जनमानस को जागृत किया तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को एक जनमुखी स्वरूप प्रदान किया|

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Published

2026-09-30

How to Cite

भारतीय ज्ञान परम्परा में कबीर की भूमिका. (2026). Shodh Utkarsh, 4(15), 49-51. https://doi.org/10.67275/31et3k80

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