समकालीन स्त्री के बदलते मायने

Authors

  • डॉ. सीमा चन्द्रन Author

Abstract

आज के दौर में भी, एक महिला अक्सर खुद को मुश्किल हालात में फंसा हुआ पाती है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बावजूद, उसे तीखे ताने सुनने या लोगों द्वारा थोपे गए लेबल से अलग अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। आज भी, परिवार की जिम्मेदारियों का पूरा बोझ उसी के कंधों पर होता है; कमाने के साथ-साथ, उससे घर-गृहस्थी के काम भी संभालने की उम्मीद की जाती है। अगर कोई चूक हो जाए, तो हालात के बजाय महिला को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है।

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Published

2025-06-30

How to Cite

समकालीन स्त्री के बदलते मायने . (2025). Shodh Utkarsh, 3(10), 58-60. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/269

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