हिन्दी की राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य धारा: एक सिंहावलोकन

Authors

  • डॉ. चंद्रकांत सिंह सहायक प्रोफेसर (हिन्दी विभाग) हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धौलाधार परिसर-01, धर्मशाला, जिला-कांगड़ा, एचपी-176215 मोबाइल नंबर-09805792455 Author

Keywords:

हिन्दी की राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य, सांस्कृतिक काव्य धारा ब्रिटिश गुलामी पर, अटकलबाजी वाली मानसिकता, सामाजिक और राजनीतिक

Abstract

हिंदी की राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य धारा ब्रिटिश गुलामी पर आधारित है और इस अटकलबाजी वाली मानसिकता का जवाब क्या हो सकता है? इस काव्य धारा ने उस समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित किया। ऑक्टेवियस का एकमात्र दिखावा संपूर्ण साम्राज्यवाद को उचित ठहराना था। साथ ही इसने एक चुनौती भी पेश की। ब्रिटिश गुलामी ने पूरे भारत को भीतर से नष्ट कर दिया। इसने खोखला कर दिया था। भारतीय विचार परंपरा, भारतीय सांस्कृतिक मूल्य ध्वस्त हो गए थे। शिक्षा, रोजगार और जीवन शैली तब तक सब कुछ बेकार हो चुका था।

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Published

2023-06-30

How to Cite

हिन्दी की राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य धारा: एक सिंहावलोकन. (2023). Shodh Utkarsh, 1(2), 58-62. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/25

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