गांधीवादी दर्शन में पर्यावरण संरक्षण: समकालीन प्रासंगिकता
Abstract
पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से महात्मा गांधी का दर्शन अत्यंत प्रासंगिक और दूरदर्शी है। औद्योगिक सभ्यता की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था, "पृथ्वी के पास हर मनुष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, किंतु हर मनुष्य के लालच को पूरा करने के लिए नहीं।"







