धूमिल के काव्य में सत्ता-संघर्ष
Abstract
समकालीन हिंदी कविता के एक प्रमुख कवि धूमिल की कविताएँ उस दौर के भारत की राजनीतिक सच्चाई को बयान करती हैं। आज़ादी के बाद के समय में, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने भारतीय राजनीति में सत्ता के लिए संघर्ष को जन्म दिया—एक ऐसा संघर्ष जो सभी राजनीतिक दलों पर हावी हो गया। गठबंधनों और आपसी मेल-जोल की राजनीति ने विपक्षी दलों को भी कमज़ोर कर दिया।







