शक्ति व शान्ति एक दूसरे के पूरक

Authors

  • डॉ.अजय कुमार पाण्डेय Author

Abstract

युद्ध और शांति एक-दूसरे के पूरक हैं; यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वे ईश्वर और भक्त के समान हैं—ऐसी सत्ताएँ जो एक-दूसरे के बिना अधूरी रहती हैं। युद्ध के बिना शांति पाना, या शांति के बिना युद्ध करना असंभव है। सृष्टि के आरंभ से ही, युद्ध और शांति निरंतर संघर्ष की स्थिति में रहे हैं—एक ऐसा संघर्ष जिसके अनंत काल तक जारी रहने की संभावना है।

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Published

2023-12-31

How to Cite

शक्ति व शान्ति एक दूसरे के पूरक . (2023). Shodh Utkarsh, 1(4), 23-24. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/77