भारतीय ज्ञान परंपरा और गीत

Authors

  • डॉ. निर्मल चक्रधर सहायक प्राध्यापक- हिन्दी माता जीजाबाई शासकीय स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय, इंदौर Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/8q4gjm30

Abstract

भारतीय ज्ञान परंपरा में गीतों की समृद्ध परंपरा रही है । गीत भावनाओं की सहज,सरल,लयबद्ध अभिव्यक्ति है । गीत न केवल शाब्दिक सौंदर्य के संवाहक हैं,अपितु मानवीय संवेदनाओं, अनुभूतियों और विचार प्रवाह को प्रस्तुत करने का माध्यम है । यह विधा वैदिक काल से लेकर आधुनिक काल तक विभिन्न रूपों में निरंतर विद्यमान रही है । गीत का सम्बन्ध केवल साहित्य सृजन से न होकर अध्यात्म,संस्कृति व संगीत से भी रहा । संस्कृत में गीत शब्द 'गा' धातु से बना है, जिसका अर्थ है- गाना । यह काव्य की एक प्रचलित विधा है, जिसमें भावनाओं की गहनता, लय की मधुरता और भाषा की सरसता का त्रिवेणी संगम प्रवाहित होता है । आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार- "गीत वह काव्य है, जो भाव प्रधान हो और गेयता का गुण उसमें प्रमुख हो ।

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Published

2026-09-30

How to Cite

भारतीय ज्ञान परंपरा और गीत . (2026). Shodh Utkarsh, 4(15), 66-68. https://doi.org/10.67275/8q4gjm30