विनोद कुमार शुक्ल की उपन्यास कला

Authors

  • अंजना प्रसाद . एस शोधार्थी,हिंदीविभाग केरल विश्वविद्यालय तिरुवनंतपुरम,केरल Author
  • डॉ.आर. जयचंद्रन वरिष्ठ आचार्य हिंदी विभाग,केरल विश्वविद्यालय तिरुवनंतपुरम,केरल Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/ey5hmw04

Keywords:

निम्म मध्यवर्गीय जीवन, नौकरशाही, आर्थिक अभाव, प्रकृति, बचपन

Abstract

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों में आम आदमी के जीवन का अंकन हुआ है। प्रस्तुत आलेख में विनोद कुमार शुक्ल की उपन्यास कला का विवेचन किया है। विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों में आम आदमी के रोज़मर्रा के जीवनानुभव, उसकी परेशानियाँ, संघर्ष आदि का चित्रण है। आपके बच्चों के लिए लिखे गये उपन्यासों में बच्चों के रंग – भरी दुनिया का चित्रण बखूबी से किया है। शुक्ल जी जो बात कहना चाहते हैं  उनको शब्दों से गढ़ते नहीं बल्कि शब्दों से खेलने की कोशिश करते हैं। यह उनकी भाषाई कौशल है।

References

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Published

2025-12-31

How to Cite

विनोद कुमार शुक्ल की उपन्यास कला. (2025). Shodh Utkarsh, 3(12), 125-126. https://doi.org/10.67275/ey5hmw04

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