रणेन्द्र की कविताओं में स्त्री वेदना

Authors

  • डॉ.रेणु सिन्हा अध्यक्ष, हिंदी विभाग निर्मला कॉलेज राँची, मो-9430763472 Author
  • मारग्रेट तिग्गा शोधार्थी, नेट, एम.फिल, हिंदी विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/SU.2026.041415

Abstract

कथाकार रणेन्द्र जितने संजीदा कथाकार हैं, उतने ही संवेदनशील व्यक्ति भी हैं। अब तक की जितनी भी लिखी रचनाएं हैं, वे अच्छी ख्याति प्राप्त हैं। मूलरूप से देखा जाए तो रणेन्द्र जी की पहचान एक आदिवासी लेखक के रूप में ही होती है। कथाकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले रचनाकार की रचनाएं आज विश्व पटेल पर संवेदनशील लोगों को जाग रही हैं। मुख्य रूप से वे उन्हें शोषण, उत्पीड़न, घुटन, बलात्कार, करुणा, बेबसी एवं अत्याचार के खिलाफ आंदोलन करने का एक साथ प्रयास कर रहे हैं। रणेन्द्र जी ने अपने कार्यकाल के दौरान जितने भी अनुभव बटोरे उनको शब्दों के माध्यम से कविता, कहानी एवं उपन्यास में रचने का प्रयास किया है। रणेन्द्र जी का आदिवासी जनजातियों के साथ गहरा संबंध एवं जुड़ाव रहा है।

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Published

2026-06-30

How to Cite

रणेन्द्र की कविताओं में स्त्री वेदना. (2026). Shodh Utkarsh, 4(14), 63-64. https://doi.org/10.67275/SU.2026.041415