'गोली' उपन्यास में पुरुष पात्रों की मनोवैज्ञानिक दुर्बलता और हताशा का चित्रण

Authors

  • डॉ.सोनू चौरे Author

Abstract

आचार्य चतुरसेन शास्त्री (1891–1960) हिंदी के एक प्रमुख ऐतिहासिक उपन्यासकार थे, जिनकी रचनाएँ अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण और मनोवैज्ञानिक गहराई के लिए जानी जाती हैं। उनका उपन्यास *वयाली* (1958) राजपूत रियासतों के *अंतःपुर* (भीतरी कक्षों) की कठोर और बिना किसी लाग-लपेट के दिखाई गई सच्चाई का मर्मस्पर्शी चित्रण करता है।

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Published

2026-03-31

How to Cite

’गोली’ उपन्यास में पुरुष पात्रों की मनोवैज्ञानिक दुर्बलता और हताशा का चित्रण. (2026). Shodh Utkarsh, 4(13), 87-88. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/399