'विष्णु पुराण में भारतबोध'
Abstract
इकबाल की इन पंक्तियों में जिस बात का ज़िक्र है—"हममें कुछ ऐसा है जो हमारी पहचान को कभी मिटने नहीं देता"—उसका स्पष्ट जवाब आचार्य रामचंद्र शुक्ल की "धाराओं के सामंजस्य" (harmony of currents) की अवधारणा में मिलता है। सदियों से, इस देश ने विपरीत विचारधाराओं को भी आत्मसात करने की क्षमता दिखाई है। यही कारण है कि यहाँ आने वाले ज़्यादातर आक्रांता अंततः भारतीय बन गए और इस भूमि तथा इसकी संस्कृति में गहराई से घुल-मिल गए।







