गुलज़ार के गीत 'कल्लू-मामा' में मनोवैज्ञानिक चेतना

Authors

  • अंकुर नाविक Author

Abstract

गुलज़ार एक असाधारण रचनात्मक हस्ती हैं जिन्होंने कविता, गीत-लेखन, पटकथा-लेखन और फ़िल्म निर्देशन जैसी कई विधाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इसके अलावा, उर्दू और हिंदी भाषाओं पर उनकी पकड़ और उनके काम के विविध पहलुओं ने उन्हें सचमुच एक बहुआयामी कलाकार के तौर पर स्थापित किया है। उनके रचनात्मक कार्यों की विविधता मानवीय मन के विभिन्न पहलुओं और उसकी जटिल उलझनों को दर्शाती है।

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Published

2025-12-31

How to Cite

गुलज़ार के गीत ’कल्लू-मामा’ में मनोवैज्ञानिक चेतना. (2025). Shodh Utkarsh, 3(12), 63-64. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/340