नाट्यशास्त्र की अवधारणा एवं आधुनिक थिएटर कला
Abstract
आचार्य भरत मुनि द्वारा रचित *नाट्यशास्त्र* भारतीय नाट्य परंपरा का आधारभूत ग्रंथ है। यह ग्रंथ न केवल नाटक की अवधारणा की पड़ताल करता है, बल्कि भारतीय सौंदर्यशास्त्र और राष्ट्रीय एकता की नींव भी रखता है। हालाँकि आधुनिक रंगमंच पश्चिमी प्रवृत्तियों, तकनीकी प्रगति और सामाजिक परिवर्तनों से प्रभावित है, फिर भी *नाट्यशास्त्र* के सिद्धांत इसमें समाहित हैं। यह शोध-पत्र *नाट्यशास्त्र* की अवधारणाओं, आधुनिक रंगमंच के साथ इसके संबंध और इसकी निरंतर प्रासंगिकता का विश्लेषण करता है।







