आज की सीता’- एक अध्ययन
Abstract
'आज की सीता' शीर्षक से ही पता चलता है कि यह कविता रामायण की पारंपरिक सीता से अलग, एक आधुनिक और जागरूक महिला की छवि पेश करती है। ऐसे दौर में जब समाज के हर कोने में महिलाओं के अधिकारों, आत्म-सम्मान, आज़ादी और समानता पर चर्चा हो रही है, 'आज की सीता' जैसी कविता बहुत प्रासंगिक हो जाती है। 'आज की सीता' वह महिला है जो सिर्फ़ अपने पति या परिवार की बात नहीं मानती, बल्कि खुद सोचती है और अपने फ़ैसले खुद लेती है। वह अन्यायपूर्ण व्यवहार—जैसे वनवास या अग्नि-परीक्षा—को चुपचाप सहती नहीं है, बल्कि सवाल उठाती है।







