'शिकंजे का दर्द' आत्मकथा में दलित महिला का यथार्थ
Abstract
भारतीय साहित्य में आत्मकथा लंबे समय से एक महत्वपूर्ण विधा रही है; हालाँकि, दलित आत्मकथा ने इस विधा को एक नए दृष्टिकोण, अनुभवों के एक नए समुच्चय और एक नई संवेदनशीलता से समृद्ध किया है। एक दलित आत्मकथा केवल किसी एक व्यक्ति के जीवन का वृत्तांत मात्र नहीं है; बल्कि, यह संपूर्ण दलित समुदाय के शोषण, संघर्ष, दमन और आत्म-साक्षात्कार की कहानी है। भारतीय समाज की जाति-आधारित जटिलताओं को सामने लाकर, यह साहित्यिक विधा सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देती है।







