[1]
“’भोलाराम का जीव’ में निहित प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सामाजिक विसंगति का आलोचनात्मक विश्लेषण”, s, vol. 3, no. 12, पृ. 98–98, दिस. 2025, अंतिम उपयोग: 17 जून, 2026. [ऑनलाइन]. पर उपलब्ध: https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/355