[1]
“गुलज़ार के गीत ’कल्लू-मामा’ में मनोवैज्ञानिक चेतना”, s, vol. 3, no. 12, पृ. 63–64, दिस. 2025, अंतिम उपयोग: 17 जून, 2026. [ऑनलाइन]. पर उपलब्ध: https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/340