“अपनों के बीच में पराए हो जाने की पौड़ा की मार्मिक अभिव्यंजना” (2024) Shodh Utkarsh, 2(7), पृ. 49–51. पर उपलब्ध: https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/168 (अंतिम उपयोग: 6 जून 2026).