[1]
2025. ’भोलाराम का जीव’ में निहित प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सामाजिक विसंगति का आलोचनात्मक विश्लेषण. Shodh Utkarsh. 3, 12 (दिस. 2025), 98–98.