हिन्दी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप

लेखक

  • कनक राज पाठक ##default.groups.name.author##

सार

यदि मेरा ध्यान भटकने लगा, तो मैं उस सार को ग्रहण नहीं कर पाऊँगा। और यदि मैं उस सार को ग्रहण नहीं कर पाया, तो परमानंद का अमृत—स्वयं 'आनंद' शब्द ही—इस छत्ते के भीतर कभी संचित नहीं हो पाएगा। आपका जीवन भी...

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प्रकाशित

2023-12-31

अंक

खंड

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