समकालीन सामाजिक संदर्भ में प्रेमचंद की कहानियाँ: एक पुनर्व्याख्या
सार
यह लेख प्रेमजी के अनेक प्रमुख कार्यों का परत दर परत वर्णन करके उनके संपूर्ण लेखन को प्रदर्शित करने का प्रयास करता है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रेमजी को केवल एक लेखक कहना कितना निरर्थक है।
वास्तव में, प्रेमजी को किसी एक दायरे में या उनकी पूर्ण छवि में देखना व्यर्थ है।







