हिंग्लिश का बढ़ता प्रभाव : हिंदी भाषा की चुनौतियाँ और संभावनाएँ

लेखक

  • डॉ. जयप्रकाश गुप्ता म. गा. हि. वि. वि. वर्धा, महाराष्ट्र ##default.groups.name.author##
  • डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय हिंदी विभाग, रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.67275/SU.2026.041418

सार

भाषा मानव जीवन के लिए संप्रेषण और परिवर्तनशील इकाई है, जो समाज के साथ हमेशा से विकसित होती रहती है। बदलते सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश में भाषाएँ भी नए रूप ग्रहण करती हैं। हिंग्लिश भाषा वर्तमान और डिजिटल संचार के दौर में भाषाओं के पारस्परिक संपर्क ने नए भाषिक रूपों को जन्म दिया है। हिंदी और अंग्रेज़ी के मिश्रण से उत्पन्न एक मिश्रित भाषा ऐसा ही एक प्रमुख उदाहरण है। प्रस्तुत शोध-पत्र में हिंग्लिश के उदय, उसके सामाजिक-भाषिक कारणों तथा हिंदी भाषा के स्वरूप पर उसके प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह पाया गया कि हिंग्लिश का प्रसार मुख्यतः शहरीकरण, शिक्षा, मीडिया और सोशल मीडिया के कारण हुआ है। हिंदी भाषा के संदर्भ में “हिंग्लिश” का उदय इसी परिवर्तन का प्रतीक है।हिंग्लिश वह मिश्रित भाषिक रूप है, जिसमें हिंदी और अंग्रेज़ी के शब्द, वाक्य संरचना तथा अभिव्यक्ति का संयुक्त प्रयोग होता है। आज के युवाओं, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसका व्यापक उपयोग देखने को मिलता है।

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प्रकाशित

2026-06-30

अंक

खंड

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