ऋता शुक्ल के उपन्यासों में मानवीय संवेदना

लेखक

  • प्रियंका कुमारी ##default.groups.name.author##
  • डा. रेणु सिन्हा ##default.groups.name.author##

सार

इंसानी संवेदना वह कोमल भावना है जो इंसान के दिल में बसती है, जिससे वह दूसरों के सुख-दुख को अपना समझता है और उनकी हंसी-खुशी और आंसुओं में शामिल होता है। यही वह गुण है जो इंसानों को दूसरे जीवों से अलग एक खास पहचान देता है। इसके बिना, इंसान कठोर, बेरहम और बनावटी हो जाता है; और जब लोग ऐसी कठोरता और बेरहमी अपना लेते हैं, तो समाज भी पूरी तरह से सख्त और मशीनी हो जाता है।

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प्रकाशित

2025-12-31

अंक

खंड

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