दलित साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि के साहित्य का अनुशीलन
सार
भारतीय साहित्य में सामाजिक न्याय और समानता की कोशिशों में दलित साहित्य ने अहम भूमिका निभाई है। यह साहित्य शोषित वर्गों के जीवन, संघर्षों और प्रतिरोध को दिखाने वाले आईने का काम करता है। ओमप्रकाश वाल्मीकि (1950–2013) हिंदी दलित साहित्य के एक अग्रणी लेखक थे। उनकी आत्मकथा, *जूठन*, सिर्फ़ उनके निजी अनुभवों का ब्यौरा नहीं है; बल्कि यह पूरे दलित समुदाय के दुख-दर्द, सामाजिक असमानता और प्रतिरोध की भावना को जीवंत रूप से पेश करने वाला एक दस्तावेज़ है।







