21वीं सदी के हिंदी यात्रा-वृतांत में अभिव्यक्त सांस्कृतिक परिवर्तन: वैश्वीकरण के युग की नई संवेदनाएँ
सार
इक्कीसवीं सदी का हिंदी यात्रा-साहित्य पारंपरिक वर्णनों से आगे निकल गया है।
यह एक व्यापक सांस्कृतिक, सामाजिक और वैचारिक अध्ययन के रूप में विकसित हुआ है।
आधुनिक यात्री वैश्वीकरण और तेज़ी से हो रही तकनीकी प्रगति से आकर्षित होता है।
दुनिया ने एक व्यापक दृष्टिकोण दिया है, जिसके कारण यात्रा अब केवल स्थान परिवर्तन मात्र रह गई है।
इसमें केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि विभिन्न सभ्यताओं, जीवन-शैलियों और मूल्यों का भी समावेश होता है।
यह तुलनात्मक विश्लेषण का एक माध्यम बन गया है।







