‘मृत्यु और हंसी’:स्त्री स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष-

लेखक

  • डॉ. विनोद कुमार विश्वकर्मा ##default.groups.name.author##

सार

भारतीय और वैश्विक, दोनों ही समाजों में मानवीय समाज के सामाजिक-आर्थिक विकास और महिलाओं के वास्तविक जीवन को बदलने के लिए संघर्ष जारी हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इतिहास में किसी न किसी मोड़ पर महिलाएं कई तरह की बेड़ियों में जकड़ी हुई थीं—जिनमें वैचारिक बंधनों से लेकर आर्थिक रूप से कमज़ोर होने की भारी बेड़ियाँ तक शामिल थीं।

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प्रकाशित

2025-12-31

अंक

खंड

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