मातृभाषा एवं क्षेत्रीय बोलियों के संरक्षण की आवश्यकता एवं महत्व

लेखक

  • डॉ. निर्मल चक्रधर ##default.groups.name.author##

सार

अगर हम इस संदर्भ पर विचार करें, तो अपनी मातृभाषा—जो जन्मस्थान और मातृभूमि से जुड़ी होती है—के महत्व को आसानी से समझा जा सकता है। यहाँ तक कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने भी अपने प्रिय भाई लक्ष्मण को जन्मस्थान और मातृभूमि का महत्व समझाया था। ऐसे में, अगर हम मातृभाषा की आवश्यकता और महत्व को नहीं समझ पाते हैं, तो इसे केवल अज्ञानता ही माना जाएगा।

##submission.citations##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2025-12-31

अंक

खंड

Articles