आचलिक कथाकारों का हिंदी साहित्य में योगदान

लेखक

  • डॉ. रेखा नागर ##default.groups.name.author##

सार

...[स्थानीय बोली]—जैसे कि "भैया, का टोला?" (भाई, कौन-सा टोला?)—और संवादों के इस्तेमाल से साहित्य को जीवंत बनाया। यह उपन्यास न केवल क्षेत्रीय साहित्य का प्रतीक है, बल्कि यह आज़ाद भारत की ग्रामीण सच्चाई को भी उजागर करता है।

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प्रकाशित

2025-09-30

अंक

खंड

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