भारतीय ज्ञान परंपरा में अष्टांग योग के विविध आयाम

लेखक

  • डॉ निकेश कुमार ##default.groups.name.author##

सार

भारतीय ज्ञान परंपरा में योग का एक विशिष्ट स्थान है। इस परंपरा के अंतर्गत, योग को भारत के सबसे बड़े योगदान के रूप में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है। योग की बढ़ती वैश्विक ख्याति भारतीय ज्ञान परंपरा की एक बड़ी उपलब्धि है। निस्संदेह, इसका श्रेय योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि को जाता है; उन्होंने *योग सूत्र* की रचना करके *अष्टांग योग*—जो आठ अंगों या आयामों वाली एक प्रणाली है—के माध्यम से संपूर्ण विश्व को लाभान्वित किया। अतः, इस शोध पत्र का उद्देश्य महर्षि पतंजलि के *योग सूत्र* में वर्णित *अष्टांग योग* के आठ आयामों का अन्वेषण करना है।

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प्रकाशित

2025-03-31

अंक

खंड

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