हिन्दी उपन्यासों के आधार पर किन्नरों की आर्थिक स्थिति
सार
भारतीय समाज शवशवधता सेपररपण़ूशह,ै जहााँशवशभन्द्न धम,श संस्कृशत,
जाशतयााँ तथा भाषाएाँ सह-अशस्तत्व मेंह।ैंइसी सामाशजक संरचना मेंएक
ऐसा समदुाय भी शवद्यमान ह,ै शजसेयगुों सेहाशशए पर रखा गया ह—ै
दकन्द्िर समुिाय। यह समदुाय न तो पण़ूतश ः परुुष ह,ैन ही स्त्री; बशल्क यह
एक ऐसेतीसरेशलंग का प्रशतशनशधत्व करता ह,ैशजसेसमाज नेलंबेसमय
तक नकारा, अपमाशनत शकया और मख्ुयधारा सेअलग रखा।







