स्वातंत्र्योत्तर हिंदी यात्रा-साहित्य में पर्यावरणीय विमर्श

लेखक

  • डॉ.रत्नेश कुमार यादव & कमल दीप सिंह ##default.groups.name.author##

सार

हिंदी साहित्य में उभरे विभिन्न विषयों में पर्यावरण का विषय बहुत महत्वपूर्ण है। इंसान पर्यावरण और प्रकृति से अटूट रूप से जुड़े हैं और अपनी ज़रूरत के संसाधन प्राकृतिक दुनिया से ही हासिल करते हैं। लेकिन, जब प्रकृति से मिले इन संसाधनों का पूरी तरह उपभोग करने के मकसद से दोहन किया जाता है, तो पर्यावरण में असंतुलन पैदा होता है—जिसके कारण आज हमें कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है।

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प्रकाशित

2024-12-31

अंक

खंड

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