दलित आत्मकथाओं में अभिव्यक्त जीवन संघर्ष
सार
भारतीय साहित्य के इतिहास में पहली बार, दलित साहित्य मराठी भाषा में लिखा गया। इसके बाद, अनुवाद के माध्यम से प्रेरणा लेते हुए, हिंदी भाषी क्षेत्रों के दलितों ने भी लिखना शुरू कर दिया। आज, हिंदी दलित साहित्य हमारे सामने विभिन्न विधाओं में मौजूद है—लघु कथाओं, कविताओं, उपन्यासों और आत्मकथाओं के रूप में। विशेष रूप से, आत्मकथाएँ लिखने की परंपरा की शुरुआत मराठी साहित्य से ही हुई थी।







