हिंदी की नवगीत परंपरा का वैशिष्ट्य
सार
हिंदी गीत-काव्य की परंपरा का एक सुव्यवस्थित इतिहास है; इसे एक सुदृढ़ आधार प्रदान करने का श्रेय हिंदी के प्रख्यात कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' को जाता है। उन्होंने हिंदी गीत-काव्य को एक व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। तत्पश्चात्, स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के काल में, उनके द्वारा प्रारंभ की गई इस काव्य-धारा में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए।







