समाज की रूढी-परम्पराओं, झूठी शान, आडंबरों से परदा उठाती कहानी- 'परदा'
सार
यशपाल हिंदी साहित्य में प्रेमचंद-युग के बाद के एक प्रमुख कथाकार हैं। प्रेमचंद के बाद कथा-लेखन में एक नए युग का सूत्रपात करने का श्रेय अकेले यशपाल को ही जाता है। क्रांतिकारी विचारों से ओत-प्रोत यशपाल समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता लाने के प्रबल पक्षधर थे। साहित्यिक क्षेत्र में कदम रखने से पहले, यशपाल क्रांतिकारी आंदोलन में सक्रिय रूप से संलग्न रहे।







