दलित कहानियों में संवेदनात्मक पक्ष, परिवर्तन और दिशा
सार
किसी भी साहित्यिक विधा का मूल आधार मानवीय अनुभव में निहित होता है; यह इंद्रियों के माध्यम से ही है कि मनुष्य सुख और दुख—दोनों का बोध और अनुभव करता है। ठीक इसी अनुभव को उन्होंने ऐतिहासिक रूप से अपनी रचनात्मक कृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। हिंदी साहित्य कहानी कहने का एक समृद्ध और विस्तृत इतिहास समेटे हुए है—एक ऐसी परंपरा जिसमें कहानियाँ...







