आदिवासी समस्याओं पर विमर्श कुडुक साहित्य के परिप्रेक्ष्य में
सार
आदिवासी शब्द से हमारे मन में एक संघर्षरत व्यक्ति या समाज, कठिनाइयों और समस्याओं से भरा जीवन, एक भ्रामक और अज्ञानी समाज की छवि उभरती है। आदिवासियों के जीवन में आज भी कई समस्याएं मौजूद हैं। उनकी संस्कृति अलग है। उनका जीवन जीने का तरीका भी अलग है। उनमें पिछड़ापन, निरक्षरता, अज्ञानता, अंधविश्वास, रूढ़िवादिता आदि भी पाई जाती हैं।







