सूरी नाम की कविताओं में यथार्थवाद

लेखक

  • ब्लेस्सनराजू रिसर्च स्कॉलर हिंदी विभाग, केरल विश्वविद्यालय तिरुवनंतपुरम, केरल ##default.groups.name.author##
  • डॉ. आर. जयचंद्र आचार्य हिंदी विभाग, केरल विश्वविद्यालय तिरुवनंतपुरम, केरल ##default.groups.name.author##

सार

साहित्य में हाशिए पर पड़े लोगों की छोटी-छोटी आवाज़ों को किस प्रकार और किस रूप में स्थान दिया जाता है? इस प्रश्न का उत्तर इतिहास में मिलता है। जब तक इतिहासकारों ने इतिहास की व्याख्या अपने-अपने तरीके से की, तब तक वह सत्ता के दबाव और बंधनों से ही संचालित होता रहा। एक समय था जब इतिहास केवल राजाओं, नेताओं और उनके अनुयायियों के हाथों में था। लेकिन सदियों बीतने के साथ, जनता को इतिहास के अनदेखे और अछूते हिस्सों को उजागर करने के अधिकार का एहसास हुआ।

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प्रकाशित

2023-09-30

अंक

खंड

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