उच्च शिक्षा में महाविद्यालय पुस्तकालय की बदलती भूमिका: चुनौतियां और संभावनाएं

लेखक

  • अवनीश मिश्रा ##default.groups.name.author##
  • डॉ. नंदकिशोर पाटीदार (पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान) ##default.groups.name.author##
  • डॉ. नंदकिशोर पाटीदार ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.67275/xbqzzv27

सार

महाविद्यालय स्तर पर शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि छात्रों में स्वतंत्र चिंतन, शोध प्रवृत्ति और ज्ञान के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति में महाविद्यालय पुस्तकालय की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। पुस्तकालय केवल सूचनाओं का भंडार नहीं है, बल्कि यह वह बौद्धिक प्रयोगशाला है जहाँ छात्र और शिक्षक अपने ज्ञान की सीमाओं का विस्तार करते हैं। डॉ. एस. आर. रंगनाथन (भारतीय पुस्तकालय विज्ञान के जनक) के अनुसार, "पुस्तकालय एक वर्धनशील संस्था है।" उच्च शिक्षा के परिदृश्य में यह कथन आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

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प्रकाशित

2026-09-30

अंक

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